"जुपिटर से परे के दुर्लभ क्षुद्रग्रह को डायनासोर के संहार का प्रमुख कारण माना गया"
विज्ञान की दुनिया में एक अहम खोज के तहत वैज्ञानिकों ने आखिरकार उस क्षुद्रग्रह का पता लगा लिया है जिसने 66 मिलियन साल पहले डायनासोर का सर्वनाश किया था। इस भयावह घटना, जिसने पृथ्वी की 70% प्रजातियों का अंत कर दिया, ने लंबे समय तक शोधकर्ताओं को हैरान किया था। लेकिन साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन से पता चला है कि यह घातक क्षुद्रग्रह, जैसा कि पहले सोचा गया था, कोई धूमकेतु नहीं था, बल्कि जुपिटर की कक्षा से परे के क्षेत्र में बना एक दुर्लभ C-प्रकार का क्षुद्रग्रह था। Credit:- AI Imagination क्षुद्रग्रह की उत्पत्ति: अध्ययन के प्रमुख लेखक, यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोन के भू-रसायनशास्त्री मारियो फिशर-गॉडे ने उन्नत तकनीकों का उपयोग करके तलछट नमूनों में रूथेनियम आइसोटोप का विश्लेषण किया। ये आइसोटोप, जो जुपिटर से परे के क्षुद्रग्रहों में पाए जाते हैं, इंगित करते हैं कि चिक्सुलुब प्रभावक का स्रोत यह दूरस्थ क्षेत्र था। धूमकेतु सिद्धांत खारिज: पहले के सिद्धांतों में कहा गया था कि संभवतः एक धूमकेतु ने इस महाविनाश का कारण बना। लेकिन नए निष्कर्ष दृढ़ता से स्थापित करते हैं कि एक दुर्लभ क्षु...