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"अप्रैल 2025 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री की ऐतिहासिक यात्रा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए तय!"

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 NASA और ISRO की साझेदारी में भारत अगले साल अप्रैल 2025  तक अपने पहले अंतरिक्ष यात्री को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर भेजने के लिए तैयार है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस ऐतिहासिक मिशन की घोषणा की, जो प्रतिष्ठित Axiom Space Ax-4 मिशन का हिस्सा है। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और प्रशांत बालकृष्णन नायर इस मिशन के लिए अमेरिका में गहन प्रशिक्षण ले रहे हैं। शुक्ला को Ax-4 मिशन के लिए चुना गया है, जबकि नायर उनके बैकअप होंगे। यह महत्वपूर्ण घोषणा भारत के पहले राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के साथ मेल खाती है, जो 23 अगस्त को चंद्रयान-3 मिशन की चंद्रमा पर सफल लैंडिंग को चिह्नित करता है। इस वर्ष की थीम है, "जीवन को छूते हुए चंद्रमा को छूना: भारत की अंतरिक्ष गाथा," जो अंतरिक्ष में भारत की निरंतर प्रगति को दर्शाती है। इसके अलावा, ISRO कई अन्य महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की तैयारी कर रहा है, जिनमें शामिल है NISAR उपग्रह का प्रक्षेपण (फरवरी 2024 के बाद) और आगामी चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 मिशन । चंद्रयान-4 का लक्ष्य चंद्रमा से नमूने वापस लान...

ISRO का 'पुष्पक' पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण वाहन अंतिम लैंडिंग प्रयोग में सफल!

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  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण वाहन ‘पुष्पक’ के तीसरे और अंतिम लैंडिंग प्रयोग को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह ऐतिहासिक घटना कर्नाटक के चित्रदुर्ग में वैमानिकी परीक्षण रेंज में हुई। ‘पुष्पक’ मिशन की मुख्य विशेषताएं: सफल अंतिम लैंडिंग : चिनूक हेलीकॉप्टर से 4.5 किमी की ऊँचाई से छोड़े गए पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण वाहन पुष्पक ने चुनौतीपूर्ण हवा की परिस्थितियों के बावजूद रनवे के केंद्र रेखा पर सटीक क्षैतिज लैंडिंग की। स्वायत्त क्षमताएं : उन्नत स्वायत्त लैंडिंग क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए, पुष्पक ने जड़त्वीय सेंसर, रडार अल्टीमीटर और NavIC नेविगेशन सिस्टम सहित बहु-संवेदी संलयन का उपयोग किया। उच्च गति लैंडिंग : वाहन ने रनवे के करीब 320 किमी/घंटा की गति से संपर्क किया, जिसे ब्रेक पैराशूट और लैंडिंग गियर ब्रेक का उपयोग करके लगभग 100 किमी/घंटा तक घटा दिया गया। सहयोगात्मक प्रयास : मिशन में विभिन्न इसरो केंद्र शामिल थे और भारतीय वायु सेना और अन्य प्रमुख एयरोस्पेस संगठनों का महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त हुआ। भविष्य की संभावनाएं : इस सफल प्रयोग ने पुन: प्रयोज्य प...